भारत के प्रमुख जैन तीर्थस्थल | A List Of Famous Jain Pilgrimage Sites In India

Jain Pilgrimage In India – भारत कई मंदिरों का समावेश है। भारत मे कई तीर्थस्‍थल है जिसमें हिन्‍दू तीर्थस्‍थल के साथ-साथ जैन तीर्थस्‍थल भी लोकप्रिय है। भारत में कई जैन तीर्थस्‍थल है जो पर्यटकों के लिये आकर्षक का केन्‍द्र बना हुए है। यहा हर वर्ष लाखों लोग आते है और इस धार्मिक स्‍थलोंं का आनंद उठाते है। आज हम ऐसे ही कुछ जैन तीर्थस्‍थलों के बारे मे आपको बतायेगें। Jain Tirth Name List

जैन तीर्थस्‍थल

पालिताना मंदिर-Palitana temple

पालिताना मंदिर काठियावाड़ (गुजरात) में शत्रुंजय पहाड़ी पर स्थित है। विशेष रूप से श्वेतांबर संप्रदाय का पवित्र धर्मस्थल माना जाता है। यह मुख्यतः पहले तीर्थंकर ऋषभदेव को समर्पित है। इसमें 800 से अधिक संगमरमर के मंदिर है।

शिखरजी-Shikharji temple

शिखरजी पारसनाथ झारखंड में है। यह पवित्रतम तीर्थस्थानों में से एक है और यह विश्वास किया जाता है कि 20 तीर्थकरों ने यही मोक्ष प्राप्त किया था।

गिरनार-Girnar temple

गिरनार मंदिर जूनागढ़ जिला (गुजरात) में स्थित है। यहां 16 मंदिरों में से सबसे बड़ा मंदिर नेमिनाथ (22वें तीर्थंकर) का है।

पावापुरी-Pawapuri temple

पावापुरी बिहार के नालंदा जिले में है। अंतिम तीर्थंकर महावीर का अंतिम संस्कार यहां किया गया था।

दिलवाड़ा मंदिर-Dilwara temple

दिलवाड़ा मंदिर माउंट आबू राजस्थान में है, जिसमें संगमरमर से निर्मित जटिल नक्काशीदार 5 अद्भुत मंदिर है। इनमें सबसे प्राचीनतम मंदिर विमल वसाही का निर्माण 11वीं शताब्दी में विमल शाह द्वारा कराया गया था। अन्य मंदिर हैं लूना वसाही, पत्तलहार, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी, जिनका निर्माण 13 वी से 17 वी शताब्दी के बीच हुआ था।

श्रवण-बेलगोला-Shravan belgola temple

श्रवण बेलगोला कर्नाटक में है। गोमेतेस्वर प्रतिमा, पहले जैन तीर्थंकर के पुत्र भगवान बाहुबली की है। इसका निर्माण 10 वीं शताब्दी ईस्वी में गंगा राजवंश के एक मंत्री चामुंडाराय द्वारा कराया गया था। इसमें कई ‘बसदी’ या जैन मंदिर है।

शांतिनाथ मंदिर-Shantinath temple

शांतिनाथ मंदिर परिसर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के ललितपुर जिले के देवगढ़ में है। इसमें सुंदर प्रतिमाओं सहित 31 मंदिर है।

बावनगजा_Bawangaja temple

बावनगजा मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में है। इसमें भगवान आदिनाथ की एक ही चट्टान से काटकर बनाई गई एक 84 फीट ऊंची प्रतिमा है।

[मध्यप्रदेश में ग्वालियर चंदेरी और खजुराहो में विभिन्न जैन मंदिर है।]

रनकपुर मंदिर-Ranakpur temple

रनकपुर मंदिर राजस्थान के पाली जिले में है। इसे 15वीं शताब्दी में बनाया गया था और इसकी वास्तुकला में बहुत कुछ होयसाल वास्तु जैसा है, न कि नगर जैसा। यहां 1400 से अधिक स्तंभ है जिन पर विस्तृत नक्काशी की गई है और प्रत्येक दूसरे से भिन्न (अदभुत) है।

चौसा, हांसी और अकोटा- chosa, hanshi or akota

चौसा (बिहार), हांसी (हिसार, हरियाणा) और अकोटा (वडोदरा, गुजरात) में कांस्य की जैन प्रतिमाओं की खोज हुई है।

कंकाली टीला-Kankali tila

कंकाली टीला उत्तर प्रदेश में (मथुरा के निकट) यहां प्रारंभिक सदियों में दान और पूजा के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अयागपट्ट नामक मन्नती पट्टिकाओं की खोज हुई थी। इन पट्टिकाओं को जैन उपासना से संबंधित वस्तुओं और डिजाइनों से सजाया गया है, जैसे स्तूपज़ धर्मचक्र और त्रिरत्न। ये एक ही साथ छवि और प्रतीकों की पूजा के रुझान को प्रस्तुत करते हैं। इन पट्टिकाओं को दान करने की प्रथा को पहली शताब्दी से तीसरी शताब्दी में उल्लेखित किया गया है।

उदयगिरि ओर खंडगिरि गुफाएं-Udaigiri or khandgiri gufayen

ओडिशा में उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं दूसरी और पहली शताब्दी ईसा पूर्व की बीच की है और जैन धर्म को समर्पित हैं। इन्हें राजा खारवेल के शासनकाल में तराशा गया था। उदयगिरि में मौजूद गुफाओं की संख्या 18 और खंडागिरी में 15 है। यहां के प्रसिद्ध गुफाओं में हाथी गुम्फा, रानी गुम्फा और गणेश गुम्फा है। इन पर नक्काशी द्वारा हाथीगुम्फा शिलालेखों सहित जैन तीर्थकरों और देवताओं को उकेरा गया है। राजा खारवेल द्वारा लिखे गए हाथीगुम्फा शिलालेख पर ब्राह्मी लिपि में 17 पंक्तियां गहरी उकेरी गई है और मुख्य रूप से इनमें राजा की विभिन्न विजयों का उल्लेख है।

अजमेर में नसिया मंदिर-Nasiya temple in ajmer

इन्हें सोनाजी की नसियां भी कहा जाता है इसे 19वीं शताब्दी में बनाया गया था और यह पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को समर्पित है।

हाथी सिंह जैन मंदिर-Hathi singh jain temple

अहमदाबाद

सित्तानवासल गुफाएं-Sittanavasal gufaye

तमिलनाडु

मांगी-तुंगी-mangi tungi temple

मांगी तुंगी महाराष्ट्र में तहाराबाद के निकट अवस्थित है। जैन धर्म को समर्पित यह एक जुड़वा शीर्ष के बीच पठारी तल है, जिसे ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रवेश द्वार का रूप माना जाता है। इसमें तीर्थकरो कि पद्मासन और कायोत्सर्ग जैसी विभिन्न मुद्राओं में चित्र है और इन्हें छठी शताब्दी ईस्वी के आसपास बनाया गया था। हाल ही में 2016 में पत्थर से निर्मित 108 फीट ऊंची अहिंसा मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में विश्व की सबसे ऊंची जैन प्रतिमा के रूप में दर्ज किया गया है।

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