भारत में मनायें जाने वाले प्रसिद्ध मेले | Famous fairs celebrated in India

हैल्‍लो दोस्‍तो आज हम आपको इस पोस्‍ट के माध्‍यम से भारत के ऐसे प्रसिद्ध मेलों famous fairs के बारे में बतायेगें जो भारत के historical fair एतिहासिक मेलो की धरोहर के रूप में जाने जाते है। हम आपको ऐसे प्रसिद्ध मेलों के बारे में बतायेगें जिसमें लाखों की संख्‍या में लोग आते है व उसका आनंद उठाते है। ये मेले प्राचीन समय से चले आ रहे है और हर मेले की एक प्राचिन विशेषता होती है। यह मेले धार्मिक व सांस्‍कृतिक परंपराओं का समावेश है। Bharat me manaye jane wale prasidh mele

भारत के मेले

विभिन्न प्रकार के धार्मिक मनोरंजनात्मा या वाणिज्य गतिविधियों के लिए लोगों के अस्थाई मिलन या उनके एक ही स्थान पर इकट्ठा होने को मेला कहते हैं। भारत के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार के मेले आयोजित किए जाते हैं उनमें से कुछ की चर्चा नीचे की गई है।

कुंभ मेला

कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक सम्मेलन है। प्रतिदिन लाखों लोग पवित्र नदी में डुबकी लगाने आते हैं। यह मेला (सम्मेलन) चार पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों-प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक-त्रिम्बक और उज्जैन में बारी-बारी से आयोजित होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन अर्थात महासागर को मथने के दौरान 1 कुंभ में अमृत उत्पन्न हुआ था। देव और असुरों के संग्राम में विष्णु द्वारा कुंभ को ले जाते समय अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर छलक गयी। वे यही चार स्थान थे जहां अब कुंभ के मेले का आयोजन होता है।

यह मेला 12 साल के समय अंतराल के बाद किसी भी दिए गए स्थान पर आयोजित किया जाता है। मेले की सटीक तिथियां सूर्य, चंद्र और बृहस्पति ग्रहों की स्थिति के अनुसार निर्धारित की जाती है। नासिक और उज्जैन में यह मेला तब होता है जब ग्रह सिंह राशि में स्थित होता है और इसे सिंहस्थ कुंभ कहा जाता है। हरिद्वार और प्रयागराज में अर्ध कुंभ मेला प्रत्येक छठे वर्ष में होता है।

स्थान जहाँ कुंभ मेला होता है:-

  • प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) – गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के संगम पर
  • हरिद्वार (उत्तराखंड) – गंगा
  • नासिक-त्रिम्बक (महाराष्ट्र) – गोदावरी
  • उज्जैन (मध्यप्रदेश) – क्षिप्रा

2017 में, यूनेस्को द्वारा कुंभ मेले को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में घोषित किया गया है।

सोनपुर मेला

यह एशिया के सबसे बड़े मवेशी मेलों में से एक है। यह मेला बिहार के सोनपुर में गंगा और गंडक नदियों के संगम पर आयोजित होता है। यह प्रातः नवंबर महीने में कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित किया जाता है। केवल यही एक मात्र स्थान है जहां बड़ी संख्या में हाथियों की बिक्री होती है और पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य यहीं से हाथी और घोड़े खरीदते थे।

चित्र विचित्र मेला

यह गुजरात का सबसे बड़ा जनजातीय मेला है जो मुख्यतः गरासिया और भील जनजाति द्वारा मनाया जाता है। इस जनजाति के लोग अपने पारंपरिक परिधान पहनते हैं और अपनी स्थानीय जनजाति संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं। होली के पश्चात अमावस्या को जनजातीय महिलाएं अपने दिवंगत प्रियजनों के लिए शोक मनाने के लिए नदी पर जाती है। अगले दिन से उत्सव प्रारंभ हो जाता है जिसमें जीवंत नृत्य प्रस्तुतियां, सर्वश्रेष्ठ हस्तशिल्प और उत्तम चांदी के गहने प्रतिवर्ष पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

शामलाजी मेला

इसे गुजरात के जनजातीय समुदाय द्वारा भगवान शामलाजी दिव्य सावला जिन्हें कृष्ण या विष्णु का अवतार माना जाता है को श्रद्धा समर्पित करने हेतु मनाया जाता है। भक्तजन बड़ी संख्या में देवता की पूजा करने के लिए और मेश्वो नदी में स्नान करने आते हैं। भीलो को शामलाजी की शक्तियों में बहुत विश्वास होता है जिसे वे स्नेह से ‘कलियों देव’ भी कहते है। यह नवंबर में लगभग 3 सप्ताह तक चलता है जिसमें कार्तिक पूर्णिमा मेले का सबसे अधिक महत्वपूर्ण दिन होता है।

पुष्कर मेला

पुष्कर मेला कार्तिक पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाला पुष्कर राजस्थान का वार्षिक मेला है। यह लगभग 1 सप्ताह तक चलता है। यह ऊँटो और मवेशियों के विश्व का सबसे बड़े मेलों में से एक है। यही वह समय है जब राजस्थानी किसान अपने मवेशी खरीदते ओर बेचते है परंतु अधिकांश व्यापार मेले के दिनों से पहले ही पूरा हो जाता है। तब उत्सव की वास्तविक गतिविधियां प्रारंभ होती है, जैसे ऊँट दौड़, मूछों की प्रतियोगिता, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता, नृत्य और ऊंट सवारी आदि की प्रतियोगिताएं इसका प्रमुख आकर्षण है। यह मेला हजारों आगंतुकों को आकर्षित करता है और विदेशी पर्यटकों में भी लोकप्रिय है।

मरुस्थल पर्व

सामान्यतः फरवरी के महीने में जैसलमेर में यह तीन दिवसीय असाधारण पर्व होता है। इस पर्व में राजस्थान की जीवंत संस्कृति प्रदर्शित की जाती है। पर्यटकों के लिए यह स्थानीय झलक प्रस्तुत करता है और राजस्थानी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करता है। राजस्थान की सुनहरी रेत के बीच पर्यटक रंगारंग लोक नृत्य और रेत के टीलों की यात्रा, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता, ऊंट की सवारी आदि का आनंद उठा सकते हैं। उत्सव की समाप्ति चांदनी रात में लोकगायकों की संगीत प्रस्तुति से होती है। यही कारण है कि मरुस्थल पर्व विदेशी पर्यटकों के दर्शन और गंतव्य सूची में होता है।

कोलायत मेला (कपिल मुनि मेला)

कोलायत मेला राजस्थान के बीकानेर में लगता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग अपने सभी पापों से मुक्त होने के लिए पवित्र कोलायत झील में स्नान करते हैं। इस मेले का नाम महान ऋषि कपिल मुनि के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने मानवता की भलाई के लिए कठिन तप किया था। एक बहुत बड़े पशु मेले का आयोजन भी किया जाता है। राजस्थान की रंगीली संस्कृति और परंपरा के आकर्षक प्रदर्शन को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या हजारों में होती है।

सूरजकुंड शिल्प मेला

यह हरियाणा में फरीदाबाद के निकट सूरजकुंड में फरवरी में आयोजित एक वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला है। यह क्षेत्रीय शिल्प के साथ अंतर्राष्ट्रीय शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को भी प्रस्तुत करता है। भारत के सभी भागों से पारंपरिक शिल्पकार इस उत्सव में भाग लेते हैं। मिट्टी के बर्तनों, बुनाई, मूर्तिकला, कढ़ाई, पेपर मैश, बांस और बेंत शिल्प के साथ धातु और लकड़ी का फर्नीचर आकर्षित करता है। इस मेले को संपूर्ण भारतीयता कि छाप देने के लिए, पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन और क्षेत्रीय व्यंजनों को परोसा जाता है।

गंगासागर मेला

इसे जनवरी-फरवरी के महीने में पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के मुहाने पर आयोजित किया जाता है। मकर सक्रांति के दिन गंगा में पवित्र डुबकी को हिंदुओं के द्वारा बहुत शुभ माना जाता है। लाखों की संख्या में तीर्थयात्री इस स्थान पर जुटते हैं। इस मेले में नागा साधुओं की उपस्थिति इस मेले को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।

गोवा कार्निवाल

पुर्तगालियों ने भारत में गोवा कार्निवाल की शुरुआत की थी। यह लेंट (Lent), जो संयम और आध्यात्मिकता की अवधि होती है, के आरंभ से 40 दिन पहले प्रारंभ होता है, इसमें दावते होती है और आनंद मनाया जाता है। लोग मुखौटा पहनकर गलियों में पार्टी करने के लिए जुटते हैं। इसमें गोवा की समृद्ध विरासत और संस्कृति का प्रदर्शन होता है और इसमें विशिष्ट पुर्तगाली प्रभाव होता है। गोवा की गलियों को रंगारंग झांकियां, परेड, लाइव बैंड और नृत्यों से सजाया जाता है और यह पर्व प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक को को आकर्षित करता है।

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