History Of KGF In Hindi? | What Is the Full Form of KGF

Story Of Real KGF In Hindi

KGF History in Hindi – हैल्‍लो दोस्‍तो जैसा की आपने KGF (Kolar Gold Fields) नाम तो फिल्‍मों में सुना ही होगा। क्‍या आप जानते है कि के.जी.एफ. (कोलार गोल्‍ड फील्‍ड्स) की असली सच्‍चाई क्‍या है, KGF का फुल फॉर्म क्‍या है?, KGF क्‍या था?, KGF से सोना कैैैसे निकाला गया?, आजादी के बाद KGF का क्‍या हुआ? व इसके इतिहास कैसा रहा! इसके बारे में आज हम आपको बतायेगें। kgf kaa full form kya he? क्या है के.जी.एफ. की असली सच्चाई?

KGF Full Form

“Kolar Gold Fields” कोलार गोल्‍ड फील्‍ड्स

KGF क्‍या है?

के.जी.एफ. भारत के कर्नाटक के कोलार जिले में बांगरपेट तालुक में स्थित एक सोने का खनन क्षैत्र है। KGF की खदान भारत में ही नही पुरे विश्‍व में प्रसिद्ध है। यह विश्‍व की दुसरी सबसे गहरी सोने की खदान है।

KGF का इतिहास

एक रिपोर्ट के मुताबिक के.जी.एफ. से करीबन ९०० टन सोना निकाला जा चुका है। ब्रिटिश सरकार के लेफ्टिनेंट जॉन वॉरेन ने इस खान के बारे में लेख लिखा था, उन्‍होने उस लेख में लिखा था कि कि सन् १७९९ में श्रीरंगपट्टनम की लडाई में अंग्रेजों ने टीपू सुल्‍तान को मार दिया व उसके बाद उन्‍होने कोलार व आस-पास की जगहों पर अपना कब्‍जा कर लिया था। कुछ सालो बाद अंग्रेजो ने इसेे मैसूूर राज्‍य को सौंप दी थी। लेकिन कोलार में सर्वे का अधिकार अंग्रेजो के पास ही था।

अंग्रेजों द्वारा पहले भी की गई थी खुदाई

सन् १८७१ में जब भारत पर अंग्रजो का शासन था, तो ब्रिटिश सैनिक माइकल फिड्जगेराल्‍ड लेवेली ने बैंगलुर में अपना घर बनवाया था। उन्‍ह‍ैै भारत के इतिहास को पडने का बडा शौक था। वे ज्‍यादातर अपना समय किताबों व अर्टिकल को पडने में लगाया करते थे। माइकल फिड्जगेराल्‍ड लेवेली ने सन् १८०४ में प्रकाशित एशियाटिक जर्नल का लेख पढा और उसमें लिखा था कि कोलार में लोग हाथ से जमीन खोद कर सोना निकाल लेते है। अंग्रेजो ने १८०४ से लेकर १८६० तक सोना निकालने के लिये कई प्रयास किये जिसमें वे विफल रहे व उसमें कई मजदुरों की मौत भी हो गई। उसके बाद अंग्रे्जो ने खुदाई पर रोक लगा दी।

अंग्रेजो द्वारा पुुुन: खुदाई की गई

इसके बाद लेेेेेेवेेेली के मन में रिसर्च करने का खयाल आया और वे कोलार पहुंच गये। मैैैैसूर के महाराज ने सन् १८७३ में लेवेली को कोलार में खुदाई की इजाजत दी। १८७५ में फिर से खुदाई शुरू की गई। अंग्रेजो द्वारा सोने की अत्‍यधिक मात्रा को देखते हुए सोने को ठौस रूप में बदलकर विदेश स्‍थानांतरण की नीति अपनाई। परन्‍तु इस सौने को निकालने के लिये अंग्रेजों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। और वह कठिनाई यह थी कि कोलार सोने के खेत का सोना ठोस रूप में ना मिलकर चुर के रूप में शामिल था।

सोना निकालनेे के लिये मशीनों एवं हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्‍लांट की स्‍थापना

सोने को निकालने के लिये अंग्रेजो ने बडी मशीनों को खदान के पास स्‍थापित किया लेकिन उन मशीनों को चलाने के लियेे बिजली की आवश्‍यकता थी, परन्‍तु उस समय भारत में बिजली नही हुआ करती थी। अंग्रेजों द्वारा शिवाना समुद्र के ऊपर से बिजली को उत्‍पन्‍न करे का निर्णय लिया गया। इस तरह हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्‍लांट का निर्माण हुआ। कोलार भारत का एक पहला शहर था जहां पर सबसे पहले बिजली पहुंची थी। हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्‍लांट की स्‍थापना के बाद भारत विश्‍व में पहली हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्‍लांट द्वारा इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने वाला देश बन गया। वर्तमान में इस हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्‍लांट को कावेरी प्‍लांट के नाम से जाना जाता है। हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्‍लांट की स्‍थापना के बाद माइनिंग शुरू की गई। गोल्‍ड की माइनिंग अंग्रेजी अधिकारी डोनल रॉबिसन के आधिपत्‍य में हुआ करता था।

सोना निकालने के लिये पानी की जरूरत

इस खदान से जो भी सोना निकलता था वह चुर के रूप में निकलता था। वह भी मिट्टी से मिला रहता था। इसलिये सोनेे को मिट्टी से अलग करने के लिये मशीनों के साथ-साथ बहुत ज्‍यादा पानी की जरूरत पढने लगी। चूंकि मशीने बडी थी इसलिये पानी की जरूरत और भी बड गई थी। इसके उपाय के लिये अंग्रेजों द्वारा पलार रिवर में एक डैम बना दिया और वही से पानी की कमी को पुरा किया जाने लगा।

लेवेली की काशिशों के बाद सन् १९०२ में केजीएफ से ९५ प्रतिशत सोना निकाला जाने लगा। सन् १९३० तक इस खान में ३० हजार मजदुर खुदाई करने लगे।

भारत का छोटा इंग्‍लैण्‍ड

कोलार गोल्‍ड फील्‍ड्स (KGF) अंग्रेजो की सबसे पसंदीदा जगह बन गई। ब्रिटिश अधिकारियों व अन्‍य इंजिनियर्स ने यहां पर अपना घर बनाना शुरू कर दिया। यहां का मौसम ठंडा होने से यह एक वेकेशन स्‍पॉट की तरह था। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार अग्रेज द्वारा इसे छोटा इंग्‍लैण्‍ड कहा जाता था।

आजादी के बाद KGF

आजादी के बाद के.जी.एफ. की खदानों पर भारत सरकार का कब्‍जा हो गया था। सन् १९५६ में इस सोने की खान का राष्‍ट्रीयकरण हो गया। भारत गोल्‍ड माइन्‍स लिमिटेड कंपनी ने सन् १९७० में फिर से सोना निकालने का काम शुरू किया। इस खदानों से भारत सरकार को शुरू में काफी फायदा हुआ लेकिन १९८० आने तक कंपनी घाटे में जाने लगी। कंपनी इतने घाटे में पहुंच गई की वो मजदुरों को आमदनी देने में असमर्थ थी। तत्‍पश्‍चात सन् २००१ में गोल्‍ड माइनिंग का कार्य बन्‍द कर दिया गया। इसके बाद आज तक कोलार गोल्‍ड फील्‍ड्स खंडहर में तब्‍दील हो गया।

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