द्रौपदी मुर्मू के जीवन की कुछ अनसुनी कहानी हिन्‍दी में | Biography of Draupadi Murmu in hindi, Story

द्रौपदी मुर्मू का जीवन

Story of Draupadi Murmu in Hindi – हम आपको इस पोस्‍ट के माध्‍यम से द्रौपदी मुर्मू की अनसुनी कहानी बतायेगें जिसे सुन कर देश की हर महिला भावुक होगी और उत्‍साहीत भी होगी। यह कहानी हर उस आम इंसान को शक्ति देगी जो किसी अमीर खानदान मे पैदा नही हुआ। जो एक आम नागरिक की तरह दिन-रात काम करके अपने परिवार का पेट पालता है। Biography of draupadi murmu in hindi

भारत के लोकतंत्र की सबसे बडी खुबसूरती यह है के ओडिशा के मयूरभंज में छोटे से मकान मे रहने वाली द्रौपदी मुर्मू अब सेकडो एकड के राष्‍ट्रपति भवन में रहेगी। द्रौपदी मयूरभंज के एक साधारण से इलाके मे रहती है जहांं मध्‍यम वर्ग के लोग निवास करते है। draupadi murmu story in hindi

अब द्रौपदी मुर्मू इस छोटे से घर से निकलकर दिल्‍ली में राष्‍ट्रपति भवन में रहेगी जो 330 एकड के क्षैत्र में फेला हुआ है जिस राष्‍ट्रपति भवन में कुल 340 कमरे है जिसका गार्डन एरिया ही सिर्फ 190 एकड मेंं फैला हुआ है और जहांं कुल मिलाकर 750 कर्मचारी काम करते है। draupadi murmu personal life

द्रौपदी मुर्मू का जन्‍म

द्रौपदी मुर्मू का जन्‍म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ था। मतलब आप समझ लिजिये की ये उनका सबसे बडा बर्थडे गिफ्ट है। 20 जूून को उनको जन्‍मदिन था और 21 जून को उनके राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार बनने का ऐलान हो गया।

दिलचस्‍प बात यह है कि वो अगर राष्‍ट्रपति का चुनाव जीत जाती है तो वह देश की पहली ऐसी राष्‍ट्रपति बन जायेगी जिनका जन्‍म आजादी के बाद हुआ है। इससे पहले नरेन्‍द्र मोदी वर्ष 2014 में देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने थे जिनका जन्‍म आजादी के बाद हुआ था।

द्रौपदी मुर्मू के जीवन का संघर्ष

द्रौपदी मुर्मू ने अपने राजनैतिक जीवन में कई सफलताएं प्राप्‍त की है लेकिन निजी जीवन मे समय ने बार-बार उनकी परिक्षा ली है और एक वक्‍त ऐसा आया जब द्रौपदी मुर्मू डिप्रेशन में भी चली गयी थी। यह बात 2009 की है जब सिर्फ 25 साल की उम्र में उनके एक बेटे की असमय मौत हो गयी थी। अपने बेटे की मृत्‍यू से द्रौपदी मुर्मू को इतना गहरा सदमा लगा की वो उस समय डिप्रे‍शन में चली गयी। और उसके बाद उन्‍होने खुद को हिम्‍मत देने के लिये अध्‍यात्‍म का रास्‍ता चुना और ब्रह्मा कुमारी संस्‍था के साथ जुड गयी।

और उसके बाद धीरे-धीरे डिप्रे‍शन से बाहर आ ही रही थी कि चार साल बाद वर्ष 2013 में एक सडक दुर्घटना में उनके दूसरे बेटे की भी मृत्‍यू हो गयी। उनके निजी जीवन में आयी ये त्रासदी यही पर नही रूकी 2013 में उनके दुसरेे बेटे की मृत्‍यू के कुछ दिन के बाद ही उनकी मां की मृत्‍यू हुई और उसके बाद उनके भाई का भी देहांत हो गया। और इस तरह 1 महिने में ही द्रौपदी मुर्मू ने पहले अपने बेटे को खोया फिर अपनी मां को खोया और फिर उनके भाई भी दुनिया से चले गये। और इन तमाम दुखों को छोडकर वो अपने जीवन में आगे बढने की कोशिश कर ही रही थी तब अगले ही साल 2014 में उनके पति का भी देहांत हो गया।

झारखण्‍ड की पहली महिला राज्‍यपाल

पति की मृत्‍यू के बाद द्रौपदी मुर्मू के लिये सामान्‍य जीवन में लोटना थोडा मुश्किल था लेकिन उन्‍होने आध्‍यात्‍म के साथ-साथ योग करना शुरू किया, डिप्रेशन के खिलाफ लडाई लडी और तब तक लडाई की जब तक उसे हरा नही दिया। और उसके बाद 2015 में झारखण्‍ड की पहली महिला राज्‍यपाल नियुक्‍त हुई। द्रौपदी मुर्मू की सबसे बडी खुबी यह है वे बहुत विनर्म स्‍वभाव की है उन्‍हे जमीन से जुडा हुआ नेता माना जाता है।

द्रौपदी मुर्मू की शिक्षा व राजनैतिक करियर

वर्ष 1979 में उन्‍होने भुवनेश्‍वर के रमा देवी महिला कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढाई पुरी की, इसके बाद उनके करियर की पहली नौकरी एक क्‍लर्क के तौर पर थी। द्रौपदी मुर्मू ने अपने करियर की शुरूआत ओडिशा सरकार के सिंचाई विभाग में एक क्‍लर्क के तौर पर की थी। हालांकि उसके बाद उन्‍होने नौकरी बदली और फिर वो एक कॉलेज मे असिस्‍टेंट प्रोफेसर बनकर छात्रों को पढाने लगी।

इसके बाद उनके जीवन मे एक मोड आया जब वह वर्ष 1997 में मयूरभंज से वार्ड परिषद बनी, यानी वार्ड पार्षद का चुनाव उन्‍होने लडा और पार्षद बन भी गयी। इसके बाद उन्‍होने अपने राजनैतिक करियर में कभी पिछे मुड कर नही देखा। वो दो बार औडिशा से विधायक बनी और 2000 से 2004 तक औडिशा की सरकार से राज्‍यमंत्री रही फिर 2015 मे उन्‍होने झारखण्‍ड की राज्‍यपाल के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई और उस समय वो राष्‍ट्रपति भवन में रामनाथ कोविंद से मिलने आयी।

द्रौपदी मुर्मू ने नही किये संशाधित कानून पर हस्‍ताक्षर

द्रौपदी मुर्मू को विनम्र स्‍वभाव होने के साथ-साथ एक कडक नेता भी माना जाता है। वो अक्‍सर अपने फैसलों को लेकर अडिक रहती है। 2017 में जब झारखण्‍ड में बीजेपी की सरकार थी और रघुबरदास मुख्‍यमंत्री थे तब उन्‍होने CNT Act और SPT Act मे कुछ बदलाव किये थे, ये कानून आदिवासी समुदाय की जमीनों की सुरक्षा से जुडे हुए थे। लेकिन तत्‍कालिन सरकार ने इनमें कुछ संशोधन किया और उन्‍हे उस समय विधानसभा से पास भी करवा लिया। लेकिन जब ये कानून द्रौपदी मुर्मू के पास मंजुरी के लिये पहुंचे क्‍योंकि मुर्मू राज्‍यपाल थी तो उन्‍होने हस्‍ताक्षर करने से मना कर दिया और इन कानूनों को वापस लौटा दिया। उनका कहना था कि ये कानून आदिवासी समुदाय के हित मे नही है। उस समय रघुबर दास दिल्‍ली आये उन्‍होने इन कानूनों को पास कराने के लिये बहुत दबाव भी बनाया लेकिन द्रौपदी मुर्मू मानी नही पिछे नही हटी। इसी तरह जब झारखण्‍ड की मौजुदा हेमन्‍त सुरेन की सरकार ने 2019 में एक संशोधित कानून द्रौपदी मुर्मू के पास मंजुरी के लिये भेजा तो उन्‍होने उसे भी न्‍याय संगत नही माना और इस कानून को वापस लौटा दिया। द्रौपदी मुर्मू एक एसी राज्‍यपाल थी जिन्‍होने अपने विवेक से अपने फैसले लिये किसी के दबाव में नही।

FAQ –

1. द्रौपदी मुर्मू का जन्‍म कब हुआ?

उत्‍तर- द्रौपदी मुर्मू का जन्‍म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ है।

2. भारत का राष्‍ट्रपति कौन है?

उत्‍तर- भारत की राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू है जो भारत की 15वीं राष्‍ट्रपति है।

3. द्रौपदी मुर्मू किन-किन पदो पर कार्य कर चुकी है?

उत्‍तर- सबसे पहले उन्‍होने ओडिशा के सिंचाई विभाग में क्‍लर्क के तौर पर कार्य किया, उसके बाद वे कॉलेज में असिस्‍टेंट प्रोफेसर बनी, फिर राजनैतिक करियर में मयूरभंज से वार्ड पार्षद बनी, वे ओडिशा से 2 बार विधायक भी रह चुकी है, वे ओडिशा सरकार से राज्‍यमंत्री भी रही और 2015 में वे झारखण्‍ड से राज्‍यपाल के रूप में नियुक्‍त की गयी।

4. द्रौपदी मुर्मू के पिता का क्‍या नाम था?

उत्‍तर- द्रौपदी मुर्मू के पिता का नाम बिरांची नारायण टुडु था।

5. द्रौपदी मुर्मू के पति का क्‍या नाम था?

उत्‍तर- द्रौपदी मुर्मू के पति का श्याम चरण मुर्मु था।

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