GDP क्‍या होता है? | What Is GDP In Hindi

दोस्‍तो आपने अब तक जीडीपी शब्‍द का इस्‍तेमाल हाेेेते हुए जरूर देखा होगा। आपने गली मोहल्‍ले में, न्‍यूज पेपर में, टीवी चैनल्‍स पर ऐसे कई बार GDP शब्‍द जरूर आया होगा। जब भी आपकी आंखो के सामने आया होगा आपने जरूर सोचा होगा की यार ये GDP है क्‍या? क्‍यों सारी पॉलीटिकल पार्टी, न्‍यूज चैनल हमेशा GDP के पिछे पडे होते है क्‍यों इतनी इंपोर्टेन्‍स GDP को दी जाती है। यहा तक की हमारेे देश के प्रधानमंत्री ये एक्‍सपर्ट करते है कि भारत की जो ईकॉनोमी है वो आने वाले समय में 5 ट्रीलियन डॉलर हो जायेगी।

GDP का फुल फॉर्म क्‍या है?

Gross Domestic Product (सकल घरेली उत्‍पाद)

GDP क्‍या है?

Gross Domestic Product किसी भी देश की आर्थिक अर्थव्‍यवस्‍था का पता लगाने का एक माध्‍यम है। किसी भी देश की अर्थव्‍यवस्‍था को मापने के लिये GDP का प्रयोग किया जाता है। जिसके माध्‍यम से देश के कुल उत्‍पाद को मापा जा सकता है। GDP को हिन्‍दी में सकल घरेलु उत्‍पाद भी कहा जाता है।

आईये हम जीडीपी को चार प्रकार से समझेेेेगें-

देश की सीमा के अंदर

इस देश के अंंदर यहां चाहे राजस्‍थान में कोई चीज बन रही है, चाहे कर्नाटक में कोई चीज बन नही है, चाहे ओडिसा में बन रही है या चाहे उत्‍तरप्रदेश में कोई चीज बन रही है कोई भी प्रोडक्‍ट या कोई भी चीज का उत्‍पादन यहांं होता है तो वह हमारी देश की जीडीपी में में काउंट होगा। अब कोई देश या कोई कंपनी बाहर की है जैसे कोई एलजी कंपनी है या बाहर की कोई भी कंपनी है, यहां आकर मध्‍यप्रदेश में प्‍लांट लगाती है और प्‍लांट लगाने के बाद उससे जो प्रोडक्‍शन होता है वो भी हमारी जीडीपी में ही काउंट होगा। तो देश की सीमा के अंदर पुरे भारत राष्‍ट्र में कहीं पर भी जाहां-जहां भी देश की सीमा है, वहां पर कही पर भी यदि कोई प्रोडक्‍शन होता है तो वह हमारी जीडीपी मे काउंट होगा। लेकिन ये सीर्फ यहां तक ही सीमित नही है ये तो हो गयी हमारी ज्‍योग्राफी लाईन या जो भी बार्डर है वहां तक हुई। लेकिन अब हमारी दुरदृृृृष्‍ट की राष्‍ट्रीय सीमा यानी की हमारी जो पॉलिटिकल सीमा होती है वो हमारेे देश की बोर्डर के बाहर समुद्र की ओर। जैसे हम वहां पर कोई तेल निकालते है या कोई मछली पकडने जा रहे है तो यहां से होने वाली सारी कमाई भी हमारी जीडीपी में काउंट होगी। हालांकि हमारी सीमा वहां तक नही है लकिन राष्‍ट्रीय सीमा जिसे कह सकते है।

एक निश्चित अवधि में

जैसे हम जीडीपी को 1 साल के लिये काउंट करते है। कहीं-कहीं किसी केस में 3 साल या 5 साल के लिये भी कैलकुलेट करते है। तो एक साल के लिये जितने भी प्रोडक्‍ट हमारेे यहां पैदा हुए है, चाहे विदेशी कंपनी हमारे यहां आ के बनाये, चाहे हमारा खुद का देश हो, देश में किसी भी जिले या किसी भी राज्‍य में बनने वाले सारे प्राडक्‍ट और उनकी जो टोटल वैल्‍यू है उसे हम जीडीपी में काउंट करते है।

घरेलु उत्‍पाद और सेवाएं (Goods And Services)

हमारे देश में बहुत सी चीजो का निर्माण होता है जैसे खाने पीने के प्रोडक्‍ट है, चाहे कपडे है, चाहे कास्‍मेटिक्‍स बन रहे है या इलेक्‍ट्रोनिक प्राडक्‍ट है। तो वो चीजे जिसे हम पैसा देकर खरिदते है फिजिकली जो आपके हाथ में आती है उसे Goods कहते है। अब Services क्‍या है तो जब भी हम किसी सर्विस के लिये पैसा लेते है और बदले में हमें कुछ भी नही मिलता उनके बदले में सर्विस मिलती है तो हम उसे सर्विसेस में लेते है जैसे कि जीम। एक उदाहरण के लिये जैसे हम जीम मे जाते है हम उसका उपयोग करते है लेकिन साथ में कुछ नही लाते, टयूशन है, स्‍कूल है वहां बच्‍चे एडुुकेशन लेते है लेकिन वहां से कुछ लाते नही है। हमारे जितने भी ट्रान्‍सपोर्टेशन सर्विस है चाहे आप हवाईजहाज से जाये, चाहे बस में जाये, आप चाहे ट्रेन में जायें वहां आप उन सेवाओं का उपयोग करते है लकिन बदले में कुछ लाते नही है।

अंतिम मूल्‍य

चलिये हम बात करते है हमारे पास फाईनल प्राडक्‍ट है जैसे गुलाब जामुन को लेते हम लेते है। गुलाब जामुन जो है वो कभी फाईनल प्राडक्‍ट नही होता है सबसे पहले कहीं न कहीं से मैदा लाया गया होगा, उसकी चासनी बनाई होगी, और बाकी चीजो को मिलाकर उनको तला है तलने के बाद चासनी में डाला है और उसके बाद हमे फाईनल प्रोडक्‍ट मिला है गुलाब जामुन। कभी आपके साथ ऐसा हुआ है मैदेे का मूल्‍य अलग है , चासनी का मूल्‍य अलग है, शक्‍कर का मूल्‍य अलग है दुकानदार आपसे इस प्रकार के मूल्‍य कभी नही लेता वह आपसे फाईनल प्रोडक्‍ट जो की गुलाब जामुन है 250 रूपये किलो है, तो आपको फाईनल मूल्‍य लगाया जाता है यह है अंतिम मूल्‍य।

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