कैसे होता है भारत के राष्‍ट्रपति का चुनाव? | How to President is Elected in Hindi

How is the President of India elected? – हेल्‍लो दोस्‍तो आईये हम जानते है कि भारत के राष्‍ट्रपति India President का चुनाव कैसे होता है कैसे चुने जाते है भारत के राष्‍ट्रपति व राष्‍ट्रपति कौन-कौन व्‍यक्ति वोट दे सकता है Who can vote for the President of India ये सम्‍पूर्ण जानकारी हम आपको इस पोस्‍ट के माध्‍यम से बतायेगें। हम बतायेगें की भारत में राष्‍ट्रपति बनने के क्‍या कानून व प्रावधान है, भारत के राष्‍ट्रपति का चुनाव अप्रत्‍यक्ष तौर पर क्‍यों होता है प्रत्‍यक्ष तौर पर क्‍यों नही, भारत के राष्‍ट्रपति चुनाव कि प्रक्रिया क्‍या है व भारत के राष्‍ट्रपति को जीतने के लिये कितने वोटो की जरूरत होती है ये सब हम अपको बतायेगें। what is the process of presidential election

भारत में राष्‍ट्रपति का चुनाव कैसे होेता है? जानिए विस्‍तृत जानकारी।

भारतीय संविधान की प्रस्‍तावना में कुछ शब्‍दों का जिक्र किया गया है इन्‍ही शब्‍दों में से एक गणराज्‍य। भारत एक गणराज्‍य है। भारत का हेड ऑफ स्‍टेट एक चुना हुआ व्‍यक्ति होता है हेड ऑफ स्‍टेट का जो पद है वो किसी इलेक्‍ट्रेड केंडीडेट को दिया जाता हैं। भारत में इसी पद को राष्‍ट्रपति के नाम से जाना जाता है। क्‍या आप जानते है भारत में राष्‍ट्रपति का चुनाव कैसे होता है आज हम इस पोस्‍ट मे इसी प्रक्रिया को समझने की कोेशिश करेगें।

इस पोस्‍ट के माध्‍यम से हम जानेगें की राष्‍ट्रपति चुनाव से संबधित वैधानिक और कानूनी प्रावधान क्‍या है साथ ही अप्रत्‍यक्ष चुनाव और निर्वाचक मंडल की क्‍या भूमिका होती है, इलेक्‍टोरल कॉलेज मे कौन-कौन शामिल होते हैै इसे भी समझने की कोशिश करेगें। साथ ही राष्‍ट्रपति चुनाव की विधि, पद्धति या किस प्रकार से राष्‍ट्रपति चुनाव आयोजित किया जाता है और राष्‍ट्रपति चुनाव जितने के लिये किसी व्‍यक्ति‍ को कितने वोटो की जरूरत होती है। इसको भी हम इस पोस्‍ट के माध्‍यम से जानेगें।

राष्‍ट्रपति चुनाव से संबधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधान

भारतीय संविधान मे अनुच्‍छेद 54 से लेकर अनुच्‍छेद 58 तक राष्‍ट्रपति चुनाव को लेकर प्रावधान किये गये है।

अनुच्‍छेद 54: राष्‍ट्रपति के चुनाव में मतदान कौन करेगा।

अनुच्‍छेद 55: राष्‍ट्रपति के चुनाव की विधि

अनुच्‍छेद 56: राष्‍ट्रपति के पद का कार्यकाल

अनुच्‍छेद 57: पुनर्निर्वाचन के लिये पात्रता

अनुच्‍छेद 58: राष्‍ट्रपति के रूप में चुनाव के लिये योग्‍यता

इसी संविधान के मुताबिक भारतीय राष्‍ट्रपति का चुनाव है वो चुनाव आयोग द्वारा आयोजित किया जाता है। राष्‍ट्रपति चुनाव के अलावा चुनाव आयोग भारत के उपराष्‍ट्रपति का चुनाव, राज्‍यसभा का चुनाव, विधानसभा का चुनाव और जो लोकसभा का चुनाव होता है उसे भी आयोजित करता है।

भारतीय संविधान के जो प्रावधान है उसके अलावा संविधान में ये भी कहा गया है कि यदि अगर संसद को लगता है कि राष्‍ट्रपति के चुनाव के लिये कुछ नये नियम कुछ नये कानून लाने की जरूरत है, तो उसके लिये भी संसद को शक्ति दी गयी है। और इसी शक्तियों का उपयोग करते हुए संसद ने राष्‍ट्रपति और उपराष्‍ट्रपति चुनाव अधिनियम 1952 पारित किया गया है।

चुनाव अधिनियम 1952 के मुताबिक कोई भी व्‍यक्ति जो राष्‍ट्रपति के रूप में चुनाव लडना चाहता है उसे कम से कम 50 प्रस्‍तावकों और 50 समर्थकों के समर्थन की जरूरत होगी यानी उसे निर्धारित करना होगा कि तकरीबन 100 लोग जो राष्‍ट्रपति के निर्वाचन मण्‍डल में शामिल है वो उसके समर्थन में है वो उसका साथ दे रहे है। या‍नी कि ऐसा ना हो की वो व्‍यक्ति चुनाव में खडा हो जाये और कोई उसको मत ही ना दे। पहले ऐसा कई बार देखने को मिल चुका है इसलिये इतना सख्‍त नियम निर्धारित किया गया है।

राष्‍ट्रपति चुनाव के लिये अप्रात्‍यक्ष‍ि चुनाव और निर्वाचक मंडल

भारतीय संविधान के मुताबिक जो राष्‍ट्रपति का चुनाव होता है वो अप्रत्‍यक्ष तरीके से होता है यानी आम लोग राष्‍ट्रपति चुनाव के लिये प्रत्‍यक्ष रूप से हिस्‍सा नही लेते है, राष्‍ट्रपति चुनाव के लिये प्रत्‍यक्ष मतदान नही करते है। बल्कि उन लोगो द्वारा चुने गये कुछ खास लोग इस प्रक्रिया में हिस्‍सा लेते है, इन्‍ही खास लोगो के समूह को निर्वाचक मंडल कहा जाता है।

निर्वाचक मंडल को और विस्‍तार से जानने से पहले हम ये जान लेते है कि राष्‍ट्रपति का चुनाव आखिर अप्रत्‍यक्ष तरीके से क्‍यूं होता है प्रत्‍यक्ष तरीके से क्‍यूं नही होता। तो भारतीय राजव्‍यवस्‍था के मुताबिक जो भारत की क्‍वालिटी है मतलब जो भारत का राष्‍ट्रपति होता है वो केवल नोमिनल हेड होता है केवल एक नामात्र का प्रमुख होता है।

वहीं जो प्रमुख शक्तियां है वो प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में मंत्रीमंडल में निहित होती है। ऐसे मे संविधान निर्माता इस पु‍री प्रक्रिया पर विचार-विमर्श कर रहे थे तो उनका मानना था क्‍योंकि राष्‍ट्रपति भारत का केवल एक ओपचारिक प्रमुख है तो उसके चुनाव के लिये हमें प्रत्‍यक्ष प्रक्रिया की जरूरत नही है। क्‍योंकि प्रत्‍यक्ष प्रक्रिया में काफी ज्‍यादा खर्च आता है। इसलिये राष्‍ट्रपति चुनाव के लिये अप्रत्‍यक्ष प्रक्रिया को अपनाया गया है।

अब हम निर्वाचक मंडल को जान लेते है– साल 1992 से पहले इसमें राज्‍य की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्‍य यानी जो भी राज्‍य थे उनकी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्‍य शामिल होते थे। इसक अलावा संसद के दोनो सदनों के निर्वाचित सदस्‍य शामिल होते थे। लेकिन 1992 में स्थिति बदल दी गयी, 1992 में 70वां सविधान संशोधन लागु किया गया और इस 70वें संविधान संशोधन के मुताबिक अब दिल्‍ली और पुडुचेरी की विधानसभा है उनके प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया में हिस्‍सा ले सकते है। यानी वर्तमान समय में राज्‍यो की विधानसभा कि निर्वाचित सदस्‍य, दिल्‍ली और पुडुचेरी कि विधानसभा के निर्वाचित सदस्‍य इसके अलावा संसद के दोनो सदनों यानी राज्‍यसभा ओर लोकसभा के‍ निर्वाचित सदस्‍य इस प्रक्रिया में‍ हिस्‍सा ले सकते है।

तो कौन लोग है जो इस प्रक्रिया मे हिस्‍सा नही ले सकते है तो राज्‍यसभा, लोकसभा और विधानसभाओं के मनोनीत सदस्‍य होत है वो इस प्रक्रिया में हिस्‍स नही ले सकते है। इसके अलावा राज्‍य की विधान परिषदों के जो सदस्‍य होते है वो भी इसमें शामिल नही होते है। और वो भी राष्‍ट्रपति के चुनाव के लिये मतदान नही कर सकते है।

तो हमने देखा कि कौन-कौन राष्‍ट्रपति चुनाव के लिये मतदान कर सकते है। तो इस तरह से राष्‍ट्रपति के चुनाव में समग्र तौर पर 4809 सदस्‍य हिस्‍सा लेते है। इसमे से 776 सदस्‍य संसद से होते है (लोकसभा से 543 व राज्‍यसभा से 233)। जबकि विधानसभाओ से जो राज्‍य कि विधानसभाएं है दिल्‍ली और पुडुचेरी और राज्‍य की जो विधानसभा है वहां से कुल 4033 सदस्‍य आते है।

2019 से पहले ये संख्‍या 4120 के आस-पास था, लेकिन 2019 में जम्‍मू-कश्मिर के राज्‍य के दर्ज को समाप्‍त कर दिया गया था। और जम्‍मू-कश्मिर ओर लद्दाख को अलग-अगल केन्‍द्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। जिसके कारण यहां कि जो कुल विधानसभा सीटे थी 87 ये समाप्‍त हो गयी थी और वर्तमान में ये संख्‍या 4033 के आस-पास है।

चुनाव की विधि

राष्‍ट्रपति चुनाव के लिये दो तरीके के लोग मतदान करते है पहला सांसद और दूसरा विधायक। और इन दोनो का जो मत होता है उनका कुछ मूल्‍य निर्धारित किया जाता है। हालांकि यहां दिलचस्‍प बात यह है कि दोनो ही लोगो के मतो का मूल्‍य अलग-अलग होता है। यानी सांसद के मतो का मूल्‍य अलग और विधायक के मतो का मूल्‍य अलग होता है। और इन मतो का मूल्‍य निर्धारित करने के लिये संविधान में एक पद्धति दी गयी है। हम आगे यही समझेगें कि किस तरह से इनके मतो का मूल्‍य निर्धारित किया जाता है।

तो सबसे पहले जान लेते है कि विधायको के मतो का मूल्‍य किस तरीके से निर्धारित किया जाता है। तो विधायक के मतो का मूल्‍य निर्धारित करने के लिये दो कारक सबसे महत्‍वपूर्ण होते है पहला कारक है राज्‍य की जनसंख्‍या ओर दूसरा कारक है राज्‍य में विधायको कि संख्‍या या‍नी राज्‍य में कितने विधायक है। अब जो राज्‍य की जनसंख्‍या है उसके लिये 1971 की जनगणना के आंकडो को आधार माना जाता है यानी इस जनगणना के आंकडो का प्रयोग किया जाता है। इसके लिये संविधान में जो पद्धति दी गयी है उसके मुताबिक अगर आपको विधायक के मतो का मूल्‍य है उसे निकालना है तो आपको राज्‍य की जो कुल जनसंख्‍या है उसे राज्‍य के कुल विधायको की संख्‍या से डिवाईड करना होगा और उसके बाद जो पूरा मूल्‍य निकल कर आयेगा उसे 1/1000 से मल्टिप्‍लाई करना होगा या फिर 1000 से डिवाईड करना होगा। तो इस तरह से आप राज्‍य के विधायको की संख्‍या को निकाल सकते है।

अब इसे हम इस तरीके से कह सकते है कि जो बडे राज्‍य होते है उनमें विधायको के मतो का मूल्‍य ज्‍यादा होता है जबकि ये छोटे राज्‍य होते है उनमें विधायकों के मतो का मूल्‍य कम होता है। हम इसे उदाहरण के लिये जान सकते है कि उत्‍तरप्रदेश मे जो विधायकों के मतो का मूल्‍य है वो 208 है जबकि सिक्किम के विधायकों के मतो का मूल्‍य केवल 7 है। क्‍योंकि उत्‍तरप्रदेश की जनसंख्‍या सिक्किम के मुकाबले काफी ज्‍यादा है। उत्‍तरप्रदेश के विधायको का जो मूल्‍य है वो अन्‍य राज्‍यो की तुलना में सबसे ज्‍यादा है। जबकि सिक्किम के विधायको का मूल्‍य अन्‍य राज्‍यो की तुलना मे सबसे कम है। तो इस तरह से उत्‍तरप्रदेश के 403 विधायक है वो राष्‍ट्रपति के निर्वाचक मंडल मे कुल 83,824 वोटो का योगदान देगें जबकि सिक्किम में जो 32 विधायक है वो राष्‍ट्रपति के निर्वाचक मंडल मे कुल 224 वोटो का ही यागदान देगें। अब जो हम अन्‍य राज्‍यों के विधायकों के मतो का मूल्‍य निकालेगें और उन्‍हे एक साथ जोडेगें तो समग्र तौर पर हमारे सामने जो निकलकर आयेगी वो 5.43 लाख है।

अब सांसदो के मतो का मूल्‍यों की बात कर लेते है यानी सांसदो के मतो का मूल्‍य किस तरह से निर्धारित किया जाता है। तो भारतीय संविधान में संबध मे संघवाद की अवधारणा का पालन किया गया है सघवाद सिद्धान्‍त लागु किये गये है। भारतीय संविधान के मुताबिक सांसदो के मतो का कुल मूल्‍य विधायकों के मतो के कुल मूल्‍य के बराबर होना चाहिये। यानी सांसदो को विधायको के बराबर हिस्‍सेदारी दी गयी है, दोनो को बराबर प्रतिनिधित्‍व दिया गया है। तो इस तरीके से हमे सांसदो के मतो का मूल्‍य निर्धारित करना है तो हमें विधायक के कुल मतो का मूल्‍य है उसे सांसदो के कुल संख्‍या से डिवाईड करना होगा। अगर हम इन दोनो को डिवाईड कर देगें तो इससे प्राप्‍त 700। मतलब एक सांसद के मतो का मूल्‍य 700 है।

राष्‍ट्रपति चुनाव में जीत के लिये कितने वोटो की जरूरत होती है।

भारतीय प्रणाली में एकल हस्‍तांतरणीय मतदान पद्धति का प्रयोग किया गया है। इस प्रणाली के तहत प्रत्‍येक मतदाता को एक ही मत देने का अधिकार होता है लेकिन वो मत हस्‍तांतरणीय होता है उसे दुसरे उम्‍मीदवारो को रेफर किेया जा सकता है। इस पुरी प्रणाली के तहत सभी जो मतदाता होते है वो उम्‍मीदवारों को वरीयता के क्रम में रैंक देते है और उसके बाद जीत के लिये वैध मतों के कुल मूल्‍य का आधे से अधिक प्राप्‍त करना आवश्‍यक होता है। यादि अगर आपको राष्‍ट्रपति बनना है तो जो भी वैध मत है उनका आधे से अधिक मूल्‍य अपको प्राप्‍त करना होगा। और इस मूल्‍य को कोटा कहा जाता है।

कोटा को निकालने के लिये एक फॉर्मुला भी होता है ‘’कोटा={(सांसद + विधायक)}+1’’ इसके तहत अगर आप कुल सांसद और विधायक का जो मूल्‍य है उसे जोड देगें और उसका एवरेज निकाल लेगें यानी उसे 2 से डिवाईड कर देगें तो आपको एक नंबर प्राप्‍त होगा आपको उस नंबर से ज्‍यादा वोट प्राप्‍त करने है यानी उसमें एक जोडकर जितना आयेगा उतने वोट आपको प्राप्‍त करना है।

यहां यह भी है कि दल-बदल विरोधी कानून राष्‍ट्रपति चुनाव में लागू नही होता  है क्‍योंकि जो मतदान होता है वो सीक्रेट बैलेट के माध्‍यम से होते है। तो जो पार्टी की लाईन होती है कोई भी व्‍यक्ति जो निर्वाचक मंडल में शामिल है वो पार्टी की लाईन से बाहर जाकर भी मतदान कर सकता है। क्‍योंकि उसे किसी को बताना नही है कि वो कौन से उम्‍मीदवार को वोट दे रहा है।

इसके अलावा जो भारत के छठे राष्‍ट्रपति थे जिन्‍होने साल 1977 से साल 1982 तक भारत मे राष्‍ट्रपति के रूप में अपनी सेवा दी वो एकमात्र ऐसे राष्‍ट्रपति थे जिन्‍हे निर्विरोध चुना गया था। उस साल लगभग 37 उम्‍मीदवारों ने अपना पर्चा भरा था लेकिन चुनाव आयोग ने 36 उम्‍मीदवारो के पर्चो को खारिज कर दिया गया था। और केवल एक ही उम्‍मीदवार नीलम संजीव रेडडी ही इस पुरी प्रक्रिया मे बचे थे तो इन्‍हे ही निर्विरोध तरीके से चुन लिया गया था।

और पढ़े –

FAQ –

Q: भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति कौन थे?

Ans: भारत प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद थे।

Q: वर्तमान में भारत का राष्‍ट्रपति कौन है?

Ans: वर्तमान में भारत की राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू है जो भारत की 15वीं राष्‍ट्रपति है।

Q: भारतीय संविधान में राष्‍ट्रपति के चुनाव को लेकर कौन-कौन से प्रावधान किये गये है?

Ans: भारतीय संविधान मे अनुच्‍छेद 54 से लेकर अनुच्‍छेद 58 तक राष्‍ट्रपति चुनाव को लेकर प्रावधान किये गये है।

Q: 70वां संविधान संशोधन किस वर्ष में लागु किया गया?

Ans: 70वां संविधान संशोधन 1992 में लागु किया गया।

Q: राष्‍ट्रपति चुनावा के लिये कौन लोग मतदान कर सकते है?

Ans: राष्‍ट्रपति चुनाव के लिेये सांसद और विधायक मतदान कर सकते है।

How to President is Elected in Hindi

***************

उम्‍मीद है कि आपको यह पोस्‍ट अच्‍छी लगी होगी। अगर दोस्‍तो आपको यह पोस्‍ट अच्‍छी लगी हो तो आप मुझे Comment करके जरूर बताएं। हम ऐसी ही पोस्‍ट अगली बार आपके लिये फिर लेके आयेगें एक नये अंदाज में और एक नये स्‍पेशल जीके हिंदी के साथ।

दोस्‍तो अगर यह पोस्‍ट आप लोगो ने पढ़ी और आप लोगो को यह पोस्‍ट अच्‍छी लगी तो कृपया ये पोस्‍ट आपके दोस्‍तो व रिश्‍तेदारों को जरूर Share करें। और आप मेरी ये पोस्‍ट Facebook, Instagram, Telegram व अन्‍य Social Media पर Share करें, धन्‍यवाद! में आपके उज्‍ज्‍वल भविष्‍य की कामना करता हुं।

Leave a Comment