भारत देश में सन् 1951 की कुछ अनसुनी बाते | Top 10 Unheard Facts of India In Hindi

Unheard Facts In Hindi – वक्त बीतता है और बीता हुआ वक्त वापस लौटता नहीं, लेकिन हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बीते हुए पल को काफी नजदीक से दिखाएंगे। आज हम आपको ले चल रहे हैं सन 1951 में जिसमें आपको नजर आएगा देश का पहला सफेद बाघ White Tiger जिसे वेजिटेरियन भी खाना पसंद था। इसके अलावा आप देखेंगे कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनकी लेडी पायलट, 1951 का एक सियासी अंधड़ भी उठता नज़र आएगा जिसमें सोमनाथ के शिवलिंग के मुद्दे पर जवाहरलाल नेहरू खफा हो गए थे। इस पोस्ट में हम आपको स्वदेशी साइकिल के बारे में बताएंगे साथ ही देश का पहला वोटर भी बताया जाएगा। तो आइए आज हम आपको 1951 की 10 कुछ अनसुनी कहानियों 10 unheard stories के बारे में बताने जा रहे है।

1 – रीवा में मिला सफेद बाघ ‘मोहन’

मध्य प्रदेश की रीवा की वजह से भारत देश का नाम पूरी दुनिया में छाया जिसकी वजह बना सफेद बाघ। भारत में सफेद बाघ 1951 में पाया गया। रीवा राजघराने के राजा मार्तण्ड को शिकार का बहुत शौक था। 1951 में जब राजा मार्तंड शिकार के लिए रीवा से लगभग 27 किलोमीटर मुकुंदपुर इलाके में गए तो उन्हें बाघ का एक छोटा बच्चा नजर आया। यह शावक लगभग 9 महीने का रहा होगा। राजा मार्तंड ने इस बच्चे पर अपनी बंदूक तान दी और गोली चलाने ही वाले थे, और फिर अचानक उनका मन बदल गया। उस नन्हे से जीव को देखने के बाद मार्तंड ने उसे मारने के बजाय पालने का मन बना लिया। वो उसे अपने साथ राजभवन ले आए। यह बाघ रीवा राजघराने का हिस्सा बन गया और इसका नाम रखा गया ‘मोहन’।

मोहन कोई ऐसा वैसा बाघ नहीं था यह दुनिया का पहला सफेद बाघ था। 60 और 70 के दशक मे मोहन की वजह से रीवा की रियासत सफेद बाघों की धरती कहीं जाने लगी। 19 साल में मोहन ने कई बाघिनों के साथ मिल कर 34 शावकों को जन्म दिया, जिसमें से 21 सफेद थे। मोहन के नाम पर मध्य प्रदेश सरकार ने डाक टिकट भी जारी की। मोहन की शोहरत इस कदर थी कि लोगों की फरमाइश पर इसे अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों के टूर पर भी ले जाया गया।

2 – सोमनाथ में शिवलिंग स्थापना

1951 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर कार्यक्रम का उद्घाटन और शिवलिंग की स्थापना होनी थी इसके लिए तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को भी निमंत्रण दिया गया था। जब यह बात उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को पता चली तो उन्होंने डॉ राजेंद्र प्रसाद से कहा कि वह इस कार्यक्रम में ना जाए। नेहरू ने तर्क दिया “भारत सरकार का इस कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है ऐसे में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को भी इससे अलग रहना चाहिए, धर्मनिरपेक्ष देश में खुद को किसी धर्म से जोड़ने पर गलत संदेश जाएगा”। डॉ राजेंद्र प्रसाद ने जवाहरलाल नेहरू के इस पत्र का जवाब भी दिया “मुझे अपने धर्म पर पूरा भरोसा है और मैं खुद को इससे अलग नहीं कर सकता”। राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू की सलाह नहीं मानी और 11 मई को वे सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए।

3 – डायरेक्टर के सामने लाइव ऑडिशन

आज बॉलीवुड ऑडिशन के लिए बकायदा एक कास्टिंग टीम होती है वहीं 1951 में डायरेक्टर और प्रोड्यूसर खुद ही कलाकारों का ऑडिशन लेते थे, लेकिन यह ऑडिशन लड़कों की तुलना में महिला कलाकारों के लिए काफी मुश्किल होता था। उस दौर में ऑडिशन देने के लिए लड़कियां घर से तैयार होकर नहीं आती थी। उनको डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के सामने ही तैयार होना पड़ता था। यहां लड़कियों के पूरे लुक को भी बारीकियों से चेक किया जाता था।

डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के सामने कपड़े चेंज करना उस समय बहुत बड़ी बात हुआ करती थी, और उसके लिए लड़कियों को काफी बोल्ड होना पड़ता था। अगर वह कलाकार रिजेक्ट हो जाती थी, तो उसे समाज में अवहेलना का शिकार भी होना पड़ता था।

4 – VIP गेस्ट की महिला पायलट

21वीं सदी में आज महिलाएं इस दुनिया से लेकर अंतरिक्ष तक की यात्रा कर रही है। वह जंगी जहाजों से लेकर फाइटर जेट, स्पोर्ट्स बाइक और रेसिंग कार तक चला रही है। लेकिन 50 के दशक में ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता था। महिलाओं के लिए अकेले बाहर निकलना काफी मुश्किल था लेकिन प्रेम माथुर की सोच अलग थी। कम मौके और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद प्रेम माथुर भारत की पहली महिला कमर्शियल पायलट बन गई।

1924 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जन्मीं प्रेम माथुर बचपन से ही आसमान में उड़ना चाहती थी, लेकिन उनकी इस ख्वाहिश को पंख दिए उनके भाई और दिल्ली फ्लाइंग क्लब के कैप्टेन अटल ने। अटल प्रेम को डराने के इरादे से राइट पर ले गए थे इस दौरान प्रेम को डराने के लिए उन्होंने कई हवाई करतब दिखाए लेकिन डरने की जगह प्रेम को काफी मजा आया, उनके खुद के भाई ने प्रेम को कहा कि वह भी पायलट बन सकती है।

बाद में प्रेम माथुर को डेकन एयरवेज़ हैदराबाद के निजाम की एयरलाइन से सबसे पहले ऑफर मिला। प्रेम से हवाई जहाज उड़ाने से जुड़े कई सवाल किए गए और उन सब में वह पास भी हो गई। बतौर कमर्शियल पायलट प्रेम की यह पहली नौकरी थी लेकिन एयरवेज़ में काम करने के दौरान प्रेम ने इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री जैसे वीआईपी लोगों को भी उनकी मंजिल तक पहुंचाया। इस तरह भारत की किसी महिला पायलट को नौकरी देने वाला पहला देश बन गया।

5 – किन्नौर में डाला पहला वोट

भारत विश्व का सबसे बड़ा ओर जीवन्त्र लोकतंत्र देश है। लोकतंत्र में जनता खुद सरकार को चुनती है। लेकिन क्या आप जानते हैं भारत का पहला चुनाव कब हुआ, पहली बार वोट कब डाले गए और वोट डालने वाला सबसे पहला वोटर कौन था। वैसे तो संविधान लागू होने के बाद भारत में पहली बार आम चुनाव के लिए फरवरी 1952 में वोट डाले गए थे। लेकिन हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में ठंड और बर्फबारी की आशंका को देखते हुए वहां 5 महीने पहले ही चुनाव करा लिए गए थे। इस तरह हिमाचल प्रदेश का किन्नौर पहली ऐसी जगह बन गया जहां देश में सबसे पहले चुनाव कराये गए। जबकि किन्नौर में ही श्याम सरन नेगी ने ही इनचुनावों में सबसे पहले वोट डाले थे। श्याम सरन नेगी 1951 में 33 साल की उम्र के थे। श्याम सरन नेगी की उम्र अब 104 है। उन्होंने पिछले आम चुनावों में भी वोट डाला था। श्याम सरन नेगी हिमाचल प्रदेश के उन 1011 मतदाताओं में शामिल है जिनकी उम्र 100 वर्ष से ज्यादा है।

6 – असम में NRC की जड़े

देश में करीब ढाई साल पहले NRC के मुद्दे पर जबरदस्त प्रदर्शन हुए थे। तब से ही इस मुद्दे पर अक्सर सियासत देखने को मिलती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि NATIONAL REGISTER OF CITIZENS का ज्ञान कहा से आया, कब आया और इसकी जड़े कहां से आई जवाब है “असम”। असम देश का इकलौता राज्य है जहां एनआरसी (NRC) बनाया जा रहा है। आसान भाषा में कहें तो एनआरसी वह प्रक्रिया है जिसमें देश पर गैरकानूनी तौर पर रह रहे विदेशी लोगों को खोजने की कोशिश की जाती है।

असम में आजादी के बाद 1951 में पहली बार NATIONAL REGISTER OF CITIZENS बना था। पहली दफा एनआरसी को जवाहरलाल नेहरू के दौर में असम में लागू किया गया था। इस NATIONAL REGISTER OF CITIZENS को लागू करने की सबसे बड़ी वजह थी , सन 1947 का बंटवारा। जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए उनकी जमीनें असम में ही थी लेकिन उन लोगों का आना जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा। इस समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 1951 में नेशनल सिटीजन रजिस्टर को लागू किया गया।

7 – एशिया में दिल्ली का डाक

गणतंत्र बनने के बाद एक ऐसा स्वर्णिम अवसर आया जब भारत को फर्स्ट एशियन गेम्स होस्ट करने का मौका मिला। 4 मार्च 1951 को मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने एशियन खेलों का उद्घाटन किया।

एशियन गेम्स में 11 देशो के 489 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, इसमे अफगानिस्तान, बर्मा, इंडोनेशिया, ईरान, जापान, नेपाल, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देश शामिल थे। हालांकि इन खेलों में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने हिस्सा नहीं लिया था उस वक्त भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद चरम पर था। दोनों देश एक युद्ध भी लड़ चुके थे। पाकिस्तान ने इस खेल आयोजन में हिस्सा न लेने का फैसला लिया। एशियन गेम्स में 24 गोल्ड मेडल जीतकर जापान ने अपनी धाक जमाई थी। तो वहीं भारत के खाते में भी 15 गोल्ड मेडल आए थे।

8 – पाकिस्तान के नाम पर खान मार्केट

71 सालों में खान मार्केट ने देश दुनिया में अपनी पहचान बनाई है या कह सकते हैं खान मार्केट नाम ही काफी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस खान मार्केट की नीव 1951 में पड़ी थी। दिल्ली के पुराने और मशहूर बाजारों में से एक खान मार्केट की स्थापना 1951 में हुई थी। खान मार्केट का नाम सीमांत गांधी के नाम से मशहूर खान अब्दुल गफ्फर के नाम पर रखा गया है, जो आगे चलकर पाकिस्तान के बड़े नेता बने।

9 – देश का पहला IIT

मैथ्स से पढ़ाई करने वाले लगभग 90% छात्रों का सपना होता है कि वो India Institute of Technology मैं दाखिला ले सके। और स्टूडेंट के इस लिस्ट में सबसे ऊपर होता है आईआईटी (IIT) खड़कपुर। दुनिया के टॉप एजुकेशनल संस्थानों मे शुमार IIT खड़कपुर की स्थापना 1951 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बंगाल में की थी। वर्तमान परिसरों का लेआऊट ओर इमारतों का डिजाइन एक स्विस वास्तुकार वार्नर एम मोजर के मार्गदर्शन में किया गया था।

10 – साईकिल क्रांति

वक्त चाहे कोई भी हो दौर चाहे कितना आधुनिक क्यों ना हो लेकिन साइकिल की सवारी कभी गुजरे दौर की बात नही हुई। सड़कों पर साइकिल की सवारी करते हुए आज भी लोग दिख जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में साइकिल क्रांति कौन लेकर आया? जानकीदास कपूर ने 1951 में एटलस साइकिल कंपनी की स्थापना की। यह कंपनी उन्होंने एक टिन शैड के नीचे से शुरु की थी, और सबसे पहले यहां साइकिल की गद्दिया ही बनाई जाती थी। इसके बाद 1952 में इसी फैक्ट्री में पहली साइकिल बनाई गई।

पहले साल इस फैक्ट्री में कुल 12000 साल के लिए बनाई गई, और उसके बाद कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा उस वक्त साइकिल स्टेटस सिंबल थी। लेकिन एयरटेल ने इन सवारी को आम लोगों तक पहुंचाया। 1958 में एटलस ने इंटरनेशनल मार्केट में कदम रखा। ओर उसके बाद Middle East, म्यांमार और साउथ अफ्रीका जैसे कई देशों में इस कंपनी की बनी साइकिले एक्सपोर्ट की गई। यहां तक कि 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियन गेम्स के लिए भी एटलस ही आधिकारिक सप्लायर्स थी।

1951 ki ansuni kahaniya

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