दल बदल कानून क्‍या है? | What is Anti Defection Law?

Anti Defection Law in Hindi – (दल बदल विरोधी कानून क्या है) दोस्‍तो अक्‍सर आपने सुना होगा कि कोई विधायक किसी राजनीतिक पार्टी के चुनाव चिन्‍ह पर चुनाव लडा और जीत भी गया, लेकिन चुुुुनाव जीतने के कुछ महीनों के बाद पता चलता है कि वो उस पार्टी को छोड कर किसी दुसरे पार्टी में शामिल हो गया है। मतलब चुनाव लडना किसी और के चिन्‍ह पर ओर चुनाव जितने के बाद किसी दुसरे पार्टी में शमिल हो जाना इसी को दल बदल कहते है। Anti Defection Law UPSC

जब देश में दल बदल कानून लागु नही था तब अक्‍सर यह देखा जाता था जिसके कारण कई राजनीतिक दलों और सरकार के लिये मुश्किलें खडी हो जाती थी। (दल बदल विरोधी अधिनियम) इसी को रोकने के लिये दल बदल कानून बनाया गया जिसमें नियम बनाये गये की कोई भी विधायक या सांसद अपने मन से पार्टी नही बदल सकता। आईये हम जानते है दल बदल कानुन क्‍या है? anti defection law in india

दल-बदल कानुन क्‍या है?

आजादी के बाद देश में कई बार ऐसा देखा गया कि एक विधायक या सांसद एक पार्टी को छोडकर दुसरी पार्टी में शामिल हो जाता था। इससे कई बार अच्‍छी खासी चल रही सरकार गिर जाती थी। राज्‍य में राजनीतिक अस्थिरता आ जाती थी। यह एक प्रकार की कुप्रथा थी। इसी को समाप्‍त करने के लिये साल 1985 में संविधान में 52 संशोधन किया गया और दल-बदल कानून को पारित कर इसे संविधान कि दसवीं अनुसूची में जोडा गया। इस कानून को लाने का मकसद सिर्फ एक था कि कोई भी विधायक बिना किसी कारण के अपने फायदे के लिये एक राजनीतिक दल का साथ छोडकर दुसरे दल में शामिल नही हो सकता है।

दल-बदल कानून किस स्थिति में लागू नही होता है?

दोस्‍तो इस कानून को बना तो दिया गया, लेकिन इसमें कुछ विकल्‍प रखे गये जिसके जरीये अगर कुछ विधायक या सांसद पार्टी छोडते भी है तो उन पर ये नियम लागू नही होता। और वे इस कानून के दायरे के बाहर होगें। लेकिन इसके लिये भी नियम काफी करेें है जैसे:-

  1. जब पूरी की पूरी राजनीतिक पार्टी किसी अन्‍य राजनीति पार्टी के साथ मिल जाती है।
  2. अगर किसी पार्टी के निर्वाचित सदस्‍य अलग होकर एक नई पार्टी बना लेते है।
  3. अगर किसी पार्टी के सदस्‍य दो पार्टियों का विलय स्‍वीकार नही करते और विलय के समय अलग ग्रुप में रहना स्‍वीकार करते है।
  4. जब किसी पार्टी के दो तिहाई सदस्‍य अलग होकर नई पार्टी में शामिल हो जाते है।

किस स्थिति में दल-बदल करने पर सांसद या विधायक की सदस्‍यता जा सकती है?

दोस्‍तो कुछ खास स्थिति में दल-बदल करने पर एक सांसद या विधायक की सदस्‍यता ज सकती है। जैसे:-

  1. सांसद या विधायक ने स्‍वेच्‍छा से राजनीतिक दल की सदस्‍यता छोडी है।
  2. सदन में वोट नही करने पर भी सदस्‍यता जा सकती है।
  3. सदन में पार्टी के खिलाफ वोट करने पर सदस्‍यता जा सकती है।
  4. चुनाव के बाद अगर एक पार्टी को छोडकर दूसरी पार्टी में शामिल होता है।

दल-बदल कानून के फायदे क्‍या है?

दोस्‍तो दल-बदल विरोधी कानून के लागु होने के बाद कई फायदे भी देखे गये है। इसके बाद पहले की तुलना में कम नेता ही दल-बदल करते है। खासकर चुनाव जीतने के बाद बहुत कम ही होते है जो इस तरह का कदम उठाते है। तो चलिये जानते है दल-बदल विरोधी कानून के फायदें:-

  1. इस कानून के लागू होने के बाद सरकार को अस्थि‍र करना मुश्किल हो गया।
  2. दल-बदल कानून के कारण सांसद या विधायक पार्टी के प्रति वफादार हुए।
  3. इस कानून के कारण पार्टी में अनुशासन बढा।
  4. राजनीतिक स्‍तर पर भ्रष्‍टाचार कम होन की उम्‍मीद बढी।

FAQ –

1. दल-बदल विरोधी कानून से संविधान का कौन-सा संशोधन संबधित है?

उत्‍तर– दल-बदल विरोधी कानून से संविधान का 52वां संशोधन संबधित है।

2. संविधान मेंं जोडी गई 10वीं अनुसूची किससे संबधित है?

उत्‍तर– संविधान में जोडी गई 10वीं अनुसूची दल-बदल के आधार पर योग्‍यता संबधी प्रावधानो से संबधित है।

3. दल-बदल विरोधी अधिनियम के अंतर्गत भारतीय संविधान में किसी सदस्य की अयोग्यता अथवा योग्यता पर निर्णय करने का अधिकार किसको प्राप्त है?

उत्‍तर– दल-बदल विरोधी अधिनियम के अंतर्गत भारतीय संविधान में किसी सदस्य की अयोग्यता अथवा योग्यता पर निर्णय करने का अधिकार लोकसभा अध्‍यक्ष को प्राप्त है

4. सर्वोच्च न्यायालय ने दल-बदल कानून (52वां संविधान संशोधन) की किस धारा या पैरा को असंवैधानिक करार दिया है?

उत्‍तर- सर्वोच्च न्यायालय ने दल-बदल कानून (52वां संविधान संशोधन) की सांतवे धारा या पैरा को असंवैधानिक करार दिया है

5. संसद का एक निर्दलीय सदस्य कितने समय के अंदर किसी राजनीतिक दल का सदस्य बन जाना चाहिए ताकि दल-बदल कानून अंतर्गत उसके विरुद्ध कोई कारवाई न हो सके?

उत्‍तर- संसद का एक निर्दलीय सदस्य 6 माह के अंदर किसी राजनीतिक दल का सदस्य बन जाना चाहिए ताकि दल-बदल कानून अंतर्गत उसके विरुद्ध कोई कारवाई न हो सके।

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