रुपया क्यों गिर रहा है और यह भारतीय अर्थव्यवस्था और लोगों को कैसे प्रभावित करेगा? | Why rupee is falling in Hindi

Why Indian Rupee Falling Down

अमेरीका डॉलर के मुकाबले हमारा रूपया गिरावट के नये-नये रिकार्ड बना रहा है। गुरूवार 14 जुलाई को पहली बार डॉलर 80 के पार पहुंच गया। ऐसे में यह गिरावट कई बडी है इससे मिडल क्‍लॉस के लोगो के लोगो के लिये मुश्किलें और बडेगी। रूपये की कमजोरी खाने पिने की चिजो से लेकर बच्‍चों की फिस तक पर असर दिखेगा। अर्थव्‍यवस्‍था का पहिंया सुस्‍त पडेगा।

हमारा रूपया हर दिन निचे क्‍यों जा रहा है

रूपये की बदहाली का पहला कारण भारत की विदेश मुद्रा भण्‍डार जारी तेज गिरावट है। RBI के मुताबिक 1 जुलाई को देश का विदेशी मुद्र भण्‍डार करीब 5 अरब डॉलर गिरकर 588 अरब डॉॅलर पर आ चुका है। इस तरह से देश का विदेशी मुद्रा भण्‍डार यानी Foreign reserves 14 महीने में सबसे कम हो गया। इधर रूपया कमजोर हो रहा है और उधर Reserve Bank इस गिरावट को थामने के लिये दनादन डॉलर बेच रहा है।

रूपये में सुनामी की दुसरी सबसे बडी वजह देश का बडता व्‍यापार घाटा है। सामाचार एजेंसी राइटर के मुताबिक ताजा आंकडे बताते है कि कच्‍चे तेल के दाम चढने व हमारे निर्यात कम रहने से देश का व्‍यापार घाटा यानी ट्रेड डेफिसिट बडकर रिकार्ड स्‍तर पर पहुंच गया है। जून 2022 में व्‍यापार घाटा 25.63 अरब डॉलर की नई उंचाई पर पहुंच गया, जबकि जून 2021 में व्‍यापार घाटा 9.61 अरब डॉलर था।

रूपये में गिरावट की एक और वजह है विदेशी निवेशकों की तरफ से हमारे बजारों से पैसा निकालना। पिछले 1 साल में विदेशी निवेशकों ने भारत के शेयर बाजारों से 32 अरब डॉलर से ज्‍यादा की रकम निकाल ली है।

डॉलर करेंसी बाजार का किंग क्‍यों है और इसके मजबूत होने से आप पर और अर्थव्‍यवस्‍था पर क्‍या असर पडने वाला है

डॉलर करेंसी बाजार का बादशाह इसलिये बना हुआ है क्‍योंकि रूपये के मुकाबले दुनिया का 85 फीसदी व्‍यापार अमेरिकी डॉलर में होता है। हमारे रिजर्व बैंक जैसे दुनियाभर के प्रमुख केन्‍द्रीय बैंको की विदेशी मुद्र भण्‍डार में 60 फीसदी से ज्‍यादा डॉलर ही होता है।

ज्‍यादातर देश आपसी व्‍यापार में भी अपनी मु्द्र की बजाय डॉलर ही लेते और देते है। ऐसे में दुनियाभर में डॉलर सर्वमान्‍य और सर्वव्‍यापी टाईप है। ऐसे में जब डॉलर का भाव चढता है तो भारत जैसे देश जो निर्यात से ज्‍यादा आयात के भरोसे है उनका खर्च बढ जाता है और उनकी मु्द्र भी कमजोर होती है।

भारत कच्‍चे तेल के लिये विदेशों पर पुरी तरह से निर्भर है क्‍योंकि यहां खपत के मुकाबले क्रुड का उत्‍पादन ना के बाराबर है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी फुड ऑइल विदेश से मंगवाता है जिसकी किमत डॉलर में चुकानी पडती है। भारत को कच्‍चा तेल मंगवाने के लिये ज्‍यादा डॉलर खर्च करने पड रहे है क्‍योंकि क्रुड ऑइल का पेमेंट डॉलर में ही होता है।

इसके अलावा युक्रेन रूस युद्ध के चलते क्रुड ऑइल के दाम काफी चढ गये है और अब भी 100 डॉलर के आस पास यह बना हुआ है। इसके चलते भारत का इंपोर्ट बिल भी तजी से बड रहा है। साथ ही इलेैक्‍ट्रोनिक आइटम, कुकिंग ऑइल और दुसरे खाने-पीने के सामान इनका आयात करने के लिये भी अब और ज्‍यादा रूपया खर्च करना होगा। इससे देश मे महंगाई और बडेगी। कुल मिलाकर कमजोर रूपया 1 नही कई तरह के दर्द दे रहा है और आगे भी देने वाला है।

महंगाई बडी तो RBI फिर से बैंको के लिये कर्ज महंगा करेगा और इसके बाद हमारे आपके बैंक भी होम लोन और कार लोन की ब्‍याजदरी बढायेगें साथ ही EMI बढ जायेगी। इससे पहले भी RBI एक फीसदी कर्ज महंगा कर चुका है। रूपये मेंं कमजोरी से हमारे देश की एक्‍सपोटर्स की चांदी हो जाती है।

आगे रूपये की चल कैसी रहने वाली है

अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी NOMURA ने इसी महीने की शुरूआत में कहा था की रूपये में अभी और तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। NOMURA के एक्‍सपर्ट के मुताबिक चालु वित्‍तीय वर्ष की तीसरी तीमाही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रूपया गिरकर 82 तक जा सकता है।

NOMURA का अनुमान है कि वित्‍तीय वर्ष 2022-23 के दौरान भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD बढकर 3.3 फीसदी पर पहुंच सकता है जिसका असर पहले से कमजोर चल रहे रूपये पर दिख सकता हैै। वित्‍तीय वर्ष 2021-22 के दौरान देश का चालु खाता घाटा 1.2 फीसदी रहा था।

NOMURA की अर्थशास्‍त्री सोनल वर्मा के मुताबिक भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बहुत आशकां के कारण रूपये का काफी दबाव बना रहेगा। अमेरिकी निवेश बैक GOLDMAN SACHS ने भी हाल में एक नोट मे कहा था कि डॉलर के मुकाबले रूपया अगले छ: महीने में 81 तक जा सकता है।

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